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**गोपालपुर PHC में प्रसव के दौरान लापरवाही का आरोप

चित्रसेन घृतलहरे, vandebharatlivetvnews//जिले के गोपालपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के दौरान कथित लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है, जहां जन्म के कुछ ही समय बाद एक नवजात शिशु की मौत हो गई। पीड़ित पिता ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पूरी घटना की निष्पक्ष जांच और दोषी स्वास्थ्य कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मामले ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और आपातकालीन प्रबंधन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना कैसे हुई?
भटगांव निवासी राकेश कुमार राजेंत्री अपनी पत्नी सोनिया राजेंत्री को प्रसव पीड़ा होने पर गोपालपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। जांच के दौरान ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ नर्स ने बताया कि—
गर्भ में बच्चे की धड़कन धीमी है
मेकोनियम (गंदा पानी) आ चुका है
स्थिति जोखिमपूर्ण है
परिजनों का कहना है कि वे महिला को तुरंत बड़े अस्पताल ले जाना चाहते थे, लेकिन स्टाफ ने 10–15 मिनट प्रतीक्षा करने को कहा।
आरोप है कि अस्पताल में इंजेक्शन लगाए गए और बार–बार पेट दबाया गया। कुछ समय बाद प्रसव तो हुआ, लेकिन नवजात शिशु सांस नहीं ले पा रहा था। स्थिति बिगड़ने पर परिजनों को बच्चे को तुरंत बड़े अस्पताल ले जाने कहा गया, लेकिन एम्बुलेंस और ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं कराई गई।
नतीजतन, परिजन निजी वाहन से जांजगीर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने नवजात को मृत घोषित कर दिया।
जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने परिजनों को कथित तौर पर बताया—
“यदि बच्चा ऑक्सीजन सपोर्ट पर रेफर किया गया होता, तो उसकी जान बच सकती थी।”
मेडिकल ऑफिसर का पक्ष
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मेडिकल ऑफिसर ने बताया—
बच्चे की हार्टबीट भर्ती के समय से ही धीमी थी
परिजनों को दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई थी
अटेंडर के आग्रह पर गोपालपुर में ही डिलीवरी कराई गई
कंसेंट फ़ॉर्म भी भरवाया गया
ऑक्सीजन देकर रेफर न करने के प्रश्न पर उन्होंने कहा—
“रेफर के बाद मरीज को किस तरह ले जाया जाएगा, यह अटेंडर की जिम्मेदारी होती है।”
पीड़ित परिवार का आरोप
पीड़ित परिवार का कहना है—
यदि बच्चे की धड़कन धीमी थी तो तुरंत रेफर क्यों नहीं किया गया?
स्टाफ ने जान-बूझकर 10–15 मिनट रुकने को कहा
प्रसव के बाद बच्चे की हालत गंभीर थी, फिर भी
न ऑक्सीजन दी गई, न एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई
जांजगीर अस्पताल में डॉक्टरों ने कहा कि
“ऑक्सीजन के साथ लाते तो बच्चा बच सकता था”
परिजनों का आरोप है कि यह स्वास्थ्य केंद्र प्रबंधन की गंभीर लापरवाही है।
जांच की मांग
पीड़ित पिता ने कलेक्टर से शिकायत कर—
घटना की जांच
संबंधित स्टाफ पर कार्रवाई
अस्पताल में ऑक्सीजन–एम्बुलेंस व्यवस्था सुधारने
की मांग की है।

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